साल 2025 की विदाई के साथ ही भारतीय क्रिकेट एक नए युग और नई चुनौतियों की दहलीज पर खड़ा है। साल 2026 भारतीय टीम के लिए केवल कैलेंडर का एक नया पन्ना नहीं है, बल्कि यह टीम इंडिया की साख और भविष्य की दिशा तय करने वाला साल होने वाला है। इस साल का सबसे बड़ा आकर्षण ICC Men’s T20 World Cup 2026 है, जिसकी मेजबानी भारत और श्रीलंका मिलकर कर रहे हैं। लेकिन इस मेगा इवेंट से इतर भी टीम इंडिया के सामने तीन ऐसी बड़ी चुनौतियां हैं, जो मैनेजमेंट और फैंस की नींद उड़ाए हुए हैं।
1. सूर्या की फॉर्म: क्या कप्तान का 'जादू' फिर चलेगा?
टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव के लिए 2026 की शुरुआत किसी बुरे सपने जैसी रही है। दुनिया के नंबर-1 टी20 बल्लेबाज माने जाने वाले सूर्या का बल्ला पिछले कुछ समय से खामोश है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2025 के अंत तक उनकी पिछली 16–17 पारियों में औसत महज 15 के आसपास सिमट कर रह गया है।
एक मैच विनर और टीम के लीडर के तौर पर यह फॉर्म चिंताजनक है। टी20 वर्ल्ड कप अब ज्यादा दूर नहीं है और अगर कप्तान खुद रन नहीं बनाएंगे, तो टीम के हौसले पस्त हो सकते हैं। सूर्या के सामने अब दोहरा संकट है—उन्हें न केवल अपनी कप्तानी की धार साबित करनी है, बल्कि मिडिल ऑर्डर में अपनी जगह के साथ न्याय भी करना है। क्या 'मिस्टर 360' अपनी लय वापस पा सकेंगे? यह 2026 का सबसे बड़ा सवाल है।
2. घरेलू टेस्ट का गिरता ग्राफ: क्या अभेद्य किला फिर बनेगा?
भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी ताकत हमेशा से घर में उसका 'अजेय' होना रही है। लेकिन हाल के समय में न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों ने भारतीय सरजमीं पर टेस्ट मैच जीतकर इस भ्रम को तोड़ दिया है। 2026 में भारत को अपनी धरती पर कई महत्वपूर्ण टेस्ट सीरीज खेलनी हैं, जो WTC (वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप) फाइनल के समीकरण तय करेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बल्लेबाज अब स्पिन फ्रेंडली पिचों पर संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल जैसे युवा कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी होगी। सीनियर खिलाड़ियों के जाने के बाद यह ट्रांजिशन का दौर है, और अगर टीम इंडिया अपने घर में दबदबा नहीं बना पाई, तो रेड बॉल क्रिकेट में भारत का वर्चस्व खतरे में पड़ सकता है।
3. गंभीर की कोचिंग: व्हाइट बॉल का जलवा बनाम रेड बॉल की चुनौती
हेड कोच गौतम गंभीर के लिए 2026 उनके कोचिंग करियर का 'एसिड टेस्ट' साबित होगा। गंभीर के कार्यकाल में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप जीतकर व्हाइट बॉल क्रिकेट में अपनी बादशाहत कायम की है। उनकी आक्रामक सोच सीमित ओवरों में कमाल दिखा रही है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट (रेड बॉल) में कहानी अलग है।
आलोचकों का तर्क है कि 'बैजबॉल' जैसी अति-आक्रामक रणनीति हर बार टेस्ट क्रिकेट में काम नहीं आती। रेड बॉल क्रिकेट में जो धैर्य और संतुलन चाहिए, वह गंभीर की रणनीति में कभी-कभी गायब दिखता है। 2026 में गंभीर को यह साबित करना होगा कि उनकी योजनाएं केवल टी20 और वनडे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे टेस्ट क्रिकेट की बारीकियों को भी बखूबी समझते हैं।