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आसमान से दुश्मनों पर बरसेगी ‘प्रचंड’ आग! भारतीय सेना को मिलेंगे 156 लड़ाकू हेलीकॉप्टर, रक्षा मंत्रालय ने दी मंजूरी

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Posted On:Saturday, March 29, 2025

भारत सरकार ने अपनी सैन्य शक्ति को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। भारतीय वायुसेना ने सितंबर 2023 में रक्षा मंत्रालय से स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर 'प्रचंड' की मांग की थी। वायुसेना की इस मांग को रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को मंजूरी दे दी। रक्षा अधिकारी के अनुसार, भारत ने 156 मेड इन इंडिया एलसीएच 'प्रचंड' हेलीकॉप्टर खरीदने के अब तक के सबसे बड़े रक्षा सौदे को मंजूरी दी है। यह निर्णय सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में लिया गया। इस सौदे पर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 2.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

एचएएल को अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर

रक्षा अधिकारी ने बताया कि यह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के लिए अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर होगा। हेलीकॉप्टरों का निर्माण कर्नाटक के बेंगलुरू और तुमकुर स्थित संयंत्रों में किया जाएगा। इससे पहले 83 लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) का सबसे बड़ा ऑर्डर दिया जा चुका था। 97 अतिरिक्त एलसीए के लिए ऑर्डर देने की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। 307 एटीएजीएस हॉवित्जर तोपों की खरीद को भी हाल ही में कैबिनेट से मंजूरी मिली है।

यह सौदा 45 हजार करोड़ रुपये का है

इस डील का उद्देश्य 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को बढ़ावा देना और भारतीय वायुसेना व थलसेना की ताकत बढ़ाना है। सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 156 भारत निर्मित एलसीएच 'प्रचंड' हेलीकॉप्टरों के लिए 45,000 करोड़ रुपये के सौदे को मंजूरी दी है। इस सौदे के तहत भारतीय सेना और वायुसेना के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से 156 हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर खरीदे जाएंगे।

किन बलों को एलसीएच 'प्रचंड' मिलेगा?

156 हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में से 90 हेलीकॉप्टर भारतीय सेना को मिलेंगे, जबकि 66 हेलीकॉप्टर भारतीय वायुसेना को दिए जाएंगे।

'प्रचंड' की ताकत

एलसीएच 'प्रचंड' लड़ाकू खोज और बचाव (सीएसएआर), शत्रु वायु रक्षा (डीईएडी) का विनाश, आतंकवाद विरोधी (सीआई) ऑपरेशन, दूर से संचालित विमान (आरपीए) को मार गिराने और ऊंचाई वाले बंकर नष्ट करने के ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाएगा। यह दुनिया का एकमात्र हेलीकॉप्टर है जो 16,400 फीट (5,000 मीटर) की ऊंचाई पर उड़ सकता है। यह सियाचिन ग्लेशियर और पूर्वी लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनाती के लिए उपयुक्त है। यह हवा से जमीन और हवा से हवा में हमला करने में सक्षम है, मिसाइलों से लैस है और दुश्मन की हवाई सुरक्षा को नष्ट कर सकता है।

'प्रचंड' की संरचना

एलसीएच में दो लोग बैठ सकते हैं। यह 51.10 फीट लंबा और 15.5 फीट ऊंचा है। सम्पूर्ण उपकरण सहित इसका वजन 5800 किलोग्राम है। यह 700 किलोग्राम तक के हथियार ले जा सकता है। इसकी अधिकतम गति 268 किमी प्रति घंटा तथा रेंज 550 किमी है। यह लगातार 3 घंटे 10 मिनट तक उड़ सकता है। यह पर्याप्त मात्रा में हथियारों और आवश्यक उपकरणों के साथ 16,400 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है। एलसीएच 20 एमएम तोप से सुसज्जित है और इसमें 4 हार्डपॉइंट हैं, जिससे रॉकेट, मिसाइल और बम दागे जा सकते हैं। इस हेलीकॉप्टर का कॉकपिट कांच का बना है और फ्रेम मिश्रित धातु का है। भविष्य में इसका संस्करण और भी उन्नत किया जाएगा।

Mi-35 और Mi-25 की जगह लेगा 'प्रचंड'

एलसीएच हेलीकॉप्टरों की तैनाती के बाद पुराने एमआई-35 और एमआई-25 हेलीकॉप्टरों को हटा दिया जाएगा। ये दोनों हेलीकॉप्टर रूस द्वारा निर्मित हैं और भारतीय वायुसेना लंबे समय से इनका प्रयोग कर रही है। इन हेलीकॉप्टरों के एक स्क्वाड्रन को पहले ही भंग कर दिया गया है क्योंकि उनकी जगह बोइंग कंपनी के AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर तैनात किए जा चुके हैं।

निष्कर्ष

156 'प्रचंड' हेलीकॉप्टरों की खरीद भारतीय सैन्य क्षमताओं को नया आयाम देने वाली है। यह सौदा न केवल स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देगा, बल्कि भारतीय सेना और वायुसेना की ताकत को भी मजबूत करेगा। यह निर्णय भारत को उच्च ऊंचाई वाले युद्धक्षेत्रों में रणनीतिक बढ़त प्रदान करेगा और आत्मनिर्भर भारत मिशन को गति देगा।


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