नई दिल्ली: भारतीय संसद में सोमवार को वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को लोकसभा में पारित कर दिया गया। इस विधेयक को लेकर देश में राजनीतिक चर्चाएँ तेज़ हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे मुस्लिम समुदाय के विकास और देश की प्रगति के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया है, जबकि विपक्ष ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह इस विधेयक को लेकर जनता को गुमराह कर रही है।
विधेयक के प्रावधानों पर सरकार की स्थिति
विधेयक को लोकसभा में पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार मस्जिदों के प्रबंधन या धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप नहीं करेगी। उन्होंने कहा, "यह विधेयक मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता को सुनिश्चित करेगा। हमारी सरकार धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करती, बल्कि उनका सुचारू संचालन सुनिश्चित करने में मदद करती है।"
इस विधेयक में एक महत्वपूर्ण संशोधन यह किया गया है कि केंद्रीय वक्फ बोर्ड में कम से कम दो महिला सदस्य तथा राज्य वक्फ बोर्ड में एक महिला सदस्य अनिवार्य रूप से होंगी। इस पर चर्चा करते हुए रिजिजू ने कहा, "हम किसी जाति या धर्म के कारण सांसद नहीं बने हैं। यह एक ट्रस्ट है और इसका प्रबंधन चैरिटी कमिश्नर करता है। इसलिए यह कहना कि कोई गैर-मुस्लिम इसे नहीं संभाल सकता, गलत होगा।"
वक्फ संपत्तियों की वैश्विक स्थिति
एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में 90% से अधिक वक्फ संपत्ति इमामबाड़ों, कब्रिस्तानों, मस्जिदों और दरगाहों के रूप में मौजूद है। मुस्लिम बहुल देशों में वक्फ संपत्तियों का प्रशासन सरकारों और धार्मिक संगठनों द्वारा किया जाता है। वक्फ बोर्ड उन देशों में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं जहाँ मुस्लिम समुदाय रहता है, जिनमें ईरान, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, नाइजीरिया, मलेशिया, भारत, बांग्लादेश, मिस्र, तुर्की और अल्जीरिया शामिल हैं। कई राज्यों में वक्फ बोर्ड धार्मिक संगठनों या सरकारी समितियों के अधीन होते हैं।
भारत और पाकिस्तान में वक्फ संपत्तियों की तुलना
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में वक्फ बोर्ड के पास कुल 3,804 वर्ग किलोमीटर भूमि है। जबकि पाकिस्तान में वक्फ बोर्ड के पास लगभग 881,913 वर्ग किलोमीटर भूमि है। यानी पाकिस्तान के पास भारत से लगभग 200 गुना अधिक वक्फ संपत्ति है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में वक्फ संपत्तियों का अस्तित्व मुगल काल से है। उस समय के शासकों ने धार्मिक प्रतिबद्धता के प्रदर्शन और जनकल्याण को सुनिश्चित करने के लिए इस प्रथा की शुरुआत की थी। वक्फ संपत्तियों का उपयोग मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों, शिक्षा संस्थानों, अनाथालयों और अन्य जनसेवा केंद्रों के लिए किया जाता था।
पाकिस्तान में वक्फ संपत्तियों का प्रशासन
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वहाँ वक्फ संपत्तियों का रखरखाव और संचालन इस्लामाबाद और राज्य सरकारों के अधीन है। पाकिस्तान में इस संपत्ति का प्रशासन धार्मिक मामलों और अंतरधार्मिक सद्भावना मंत्रालय के तहत आता है।
वहीं, भारत में वक्फ संपत्ति इस्लामी कानून (शरिया) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें कोई भी व्यक्ति अपनी संपत्ति को स्थायी रूप से धार्मिक, सामाजिक या परोपकारी उद्देश्यों के लिए दान कर सकता है। इस्लामी कानून के अनुसार, एक बार दान की गई संपत्ति किसी भी व्यक्तिगत स्वामित्व से परे होती है और इसे 'अल्लाह की संपत्ति' माना जाता है।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
जहाँ भाजपा ने इसे मुस्लिम समुदाय के हित में बताया है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर कई सवाल उठाए हैं। कांग्रेस, एआईएमआईएम और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार इस विधेयक के ज़रिए वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में दखल देना चाहती है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा को मजबूत करेगा या उन्हें कमजोर करेगा।"
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इस विधेयक को लेकर चिंता जताई और कहा, "यह विधेयक पारदर्शिता बढ़ाने के नाम पर धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता को सीमित कर सकता है।"
नए विधेयक के प्रभाव
वक्फ संशोधन विधेयक 2025 के पारित होने से वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया जा रहा है। इसमें यह प्रावधान किया गया है कि वक्फ बोर्डों का लेखा-जोखा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगा और किसी भी अनियमितता की स्थिति में सरकार कार्रवाई कर सकेगी।
हालाँकि, इस विधेयक को लेकर अभी भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन में सहायक होगा, या फिर यह विपक्ष के दावों की तरह किसी बड़े एजेंडे का हिस्सा है? इसका उत्तर आने वाले समय में स्पष्ट होगा।